Photo: IPRD Jharkhand.
जोहार रांची, 29 दिसंबर। हेमंत है तो हिम्मत है। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर यह पंक्ति बिल्कुल फिट बैठती है। जिस तरह से हेमंत सोरेन ने राजनीति की है और राज्य को एक स्थिर सरकार देकर विकास की पटरी पर ला कर खड़ा कर दिया है, इससे यह कहना बेमानी नहीं होगा कि हेमंत ने राज्य को जिस जगह पर खड़ा किया है, उससे अब राज्य आगे ही बढ़ेगा, पीछे नहीं जाएगा।
गठबंधन सरकार की अपनी चुनौतियां होती हैं पर हेमंत ने अपनी राजनीतिक समझ से ये साबित कर दिया है कि एक दूरदर्शी नेता अपनी सोच से कैसे आगे बढ़ सकता है और राज्य को विकास की पटरी पर ला सकता है।
यूपीए गठबंधन में एक मजबूत नेता
अपनी कार्यशैली के लिए हेमंत सोरेन जाने जाते हैं। झारखंड की राजनीति की जड़ों तक उनकी पकड़ मजबूत है, जो उन्हें एक कद्दावर चेहरा बनाती है। उनकी यही छवि उन्हें देश में आदिवासियों का सबसे बड़ा नेता बनाती है। अपनी राजनीतिक समझ से हेमंत सोरेन यूपीए गठबंधन में एक मजबूत नेता बनकर उभरे। लेकिन, उन्होंने हमेशा से झारखंड और यहां के मुद्दों और जनता को प्राथमिकता में रखा और उनके लिए आवाज उठाई। उनकी जीत से उनके विरोधियों के स्वर उनके प्रति थोड़े नरम भी हुए।
पिताजी और दिशोम गुरु शिबू सोरेन का अक्स
साल 2024 की शुरुआत थी, राज्य में विधानसभा चुनाव के लिए छह महीने का वक्त बचा था, तभी ईडी ने एक मामले में हेमंत सोरेन पर शिकंजा कस दिया और वो जेल चले गए। इस बीच उनके पारिवारिक करीबी और पिता के मित्र चंपई सोरेन को झारखंड का मुख्यमंत्री बना दिया गया। एक समय के लिए सभी को लगा कि झारखंड में हेमंत युग का अंत हो जाएगा और एक कद्दावर आदिवासी नेता का भविष्य अब खत्म हो जाएगा क्योंकि चुनाव सिर पर थे और हेमंत जेल में थे।
लेकिन, हेमंत छह महीने बाद जेल से बाहर आ गए तो एक नए जोश, नए तेवर और नए लुक के साथ। पिताजी और दिशोम गुरु शिबू सोरेन का अक्स उनमें दिख रहा था। जेल से निकलने के बाद उन्होंने चुनाव लड़ा और परिणामों से सबको चौंका दिया। उनकी पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा ने बंपर जीत दर्ज की। अपनी जीत की बदौलत हेमंत झारखंड में यूपीए गठबंधन का प्रमुख चेहरा बने पर इसे अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया और गठबंधन के साथियों का भी भरपूर सम्मान किया और मजबूत सरकार बनाई।
वरिष्ठ पत्रकार और रांची प्रेस क्लब के अध्यक्ष शंभुनाथ चौधरी कहते हैं, “राज्य के 24 वर्षों के इतिहास में इसके पहले कोई सरकार रिपीट नहीं हुई थी। हेमंत सोरेन ने इसे मुमकिन कर दिखाया है। चार बार सीएम के तौर पर शपथ लेने वाले वह झारखंड के पहले नेता हैं। अब तक किसी भी गठबंधन या पार्टी ने राज्य की 81 सदस्यीय विधानसभा में 50 का आंकड़ा नहीं छुआ था। इस बार 56 विधायकों के साथ सरकार बनाई। यह आंकड़ा दो तिहाई से भी दो ज्यादा है।”
साहसिक और व्यावहारिक निर्णय लेने के लिए प्रसिद्ध
हेमंत सोरेन झारखंड के विकास को केंद्र में रखकर राजनीति करने वाले दूरदर्शी नेता हैं। वे आदिवासी समाज की आवाज को मजबूती से राजनीतिक मंच पर रखने वाले प्रमुख नेता हैं। उनका राजनीतिक जीवन संघर्ष, धैर्य और निरंतरता का उदाहरण है। उन्होंने हमेशा राज्य के प्राकृतिक संसाधनों पर झारखंड के लोगों का अधिकार सुनिश्चित करने की बात की है।
हेमंत सोरेन जनहित में साहसिक और व्यावहारिक निर्णय लेने के लिए जाने जाते हैं। उनकी निर्णय-क्षमता जमीनी सच्चाइयों पर आधारित होती है, न कि केवल कागजी योजनाओं पर। प्रशासन में उन्होंने पारदर्शिता और जवाबदेही पर विशेष जोर दिया है। सामाजिक कल्याण योजनाओं को सरल और आम जनता तक पहुंचाने का उनका दृष्टिकोण सराहनीय है।
हेमंत सोरेन पिछले छह-सात वर्षों में हिंदी पट्टी में एक ऐसे जमीनी, रणनीतिक और जनता से भावनात्मक रूप से जुड़ाव रखने वाले नेता के रूप में उभरे हैं, जो न सिर्फ अपने मुद्दों पर मजबूती के साथ टिके रहते हैं, बल्कि अपने राजनीतिक विरोधियों की चालों को भी नाकाम कर देते हैं। उन्होंने न सिर्फ झारखंड की ‘रिपीट सरकार नहीं’ वाली धारणा तोड़ी, बल्कि वर्ष 2024 के अंत में हुए विधानसभा चुनाव में दो-तिहाई बहुमत के साथ यह साबित किया कि उनकी पैठ लगातार मजबूत हो रही है। महिलाओं, आदिवासियों, किसानों और ग्रामीण मतदाताओं के बीच उनकी स्वीकार्यता ने उन्हें हिंदी भाषी पट्टी में भाजपा के मुकाबले एकमात्र ऐसे मुख्यमंत्री के रूप में स्थापित किया है, जो लगातार रणनीतिक बढ़त बनाए हुए हैं। बाहरी नेतृत्व बनाम स्थानीय अस्मिता की लड़ाई में हेमंत सोरेन ने खुद को झारखंडी पहचान के प्रतीक के तौर पर सफलतापूर्वक प्रस्तुत किया। कुल मिलाकर, हेमंत सोरेन अब केवल एक राज्य के नेता नहीं, बल्कि हिंदी पट्टी की समकालीन राजनीति में भाजपा-विरोधी प्रभावी नेतृत्व का मजबूत चेहरा बन चुके हैं।
– शंभुनाथ चौधरी, वरिष्ठ पत्रकार और रांची प्रेस क्लब के अध्यक्ष
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हर किरदार में हेमंत सोरेन दमदार
शिक्षा के क्षेत्र में उन्होंने सरकारी स्कूलों और छात्रों के लिए बेहतर अवसर उपलब्ध कराने पर ध्यान दिया है। वे युवाओं को शिक्षा और रोजगार से जोड़ने के पक्षधर हैं। हेमंत सोरेन झारखंड की आदिवासी और लोक संस्कृति के सच्चे संरक्षक हैं। उन्हें झारखंड की भाषा, परंपराओं और रीति-रिवाजों पर गर्व है। वे सरना, आदिवासी और स्थानीय सांस्कृतिक विश्वासों का सम्मान करते हैं। उनकी राजनीति में सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक न्याय का विशेष स्थान है।
उन्होंने झारखंड की अस्मिता को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का प्रयास किया है। हेमंत सोरेन का झारखंड और उसके लोगों से गहरा भावनात्मक जुड़ाव है। वे गरीब, किसान, मजदूर और आदिवासी वर्ग के हितों के लिए निरंतर काम करते हैं। संकट के समय राज्य की जनता के साथ खड़े रहना उनकी नेतृत्व शैली की पहचान है। वे सरल जीवन, सादगी और जमीन से जुड़े नेता के रूप में जाने जाते हैं। हेमंत सोरेन का लक्ष्य एक समृद्ध, आत्मनिर्भर और सम्मानित झारखंड का निर्माण करना है।
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