फोटो - सन्नी खान, मधुपुर
जोहार मधुपुर/सन्नी खान, 23 फरवरी। झारखंड के देवघर जिले के मधुपुर में स्थित विश्वभर में प्रसिद्ध सांख्य-योग तपस्थली कपिल मठ (Madhupur Kapil Math) बावनबीघा में सांख्ययोगाचार्य श्रीमद् स्वामी भाष्कर आरण्यजी ब्रह्मलीन (Swami Bhaskar Aranya Brahmaleen) हो गए। स्वामी भाष्कर आरण्य का जन्म 18 अगस्त 1942 को मधुपुर में कुलीन बंगाली परिवार में हुआ था। उनके माता-पिता कोलकाता के निवासी थे। वह अक्सर झारखंड के मधुपुर में अपने कोठी में आया करते थे। स्वामी भाष्कर आरण्य अपने गुरु स्वामी धर्ममेघ आरण्य से दीक्षित हुए जो कपिल मठ गुहा में साधनारत थे।

श्रीमद् स्वामी धर्ममेघ आरण्य की महासमाधि के बाद श्रीमद् स्वामी भाष्कर आरण्य वर्ष 1986 में कपिल गुहा में रूद्ध हुए। निरंतर 40 वर्षों तक सांख्य- योग का अवलंबन करते हुए साधना में लीन रहे। गत दिनों उन्होंने अपने शिष्यों को बुलाकर देह त्याग करने की घोषणा कर दी थी। आध्यात्मिक चेतना की उच्च शिखर पर आरूढ़ हो रविवार को नश्वर शरीर को त्याग दिया।
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स्वामी जी का पार्थिव शरीर कपिल मंदिर में दर्शनार्थ रखा गया। हजारों की संख्या में श्रद्धालु दर्शन करने के लिए पहुंचे। रविवार को दोपहर विधिवत समाधि प्रक्रिया पूरी हुई। पूरा मठ ‘ओम आदि विदुषे कपिलाय नमः’ से गुंजायमान होता रहा। इस अवसर पर काफी संख्या में हिंदू, मुस्लिम महिला-पुरुष और बच्चे उपस्थित थे।

मधुपुर स्थित कपिल मठ सांख्य योग दर्शन का एक प्रसिद्ध साधना स्थल है, जिसकी स्थापना 1927-28 में स्वामी हरिहरानंद अरण्य ने की थी। यह मठ सांख्य दर्शन के प्रचार-प्रसार, आध्यात्मिक उन्नति और निर्गुण धर्म के अध्ययन का प्रमुख केंद्र है, जहां स्वामी हरिहरानंद ने लगभग 21 वर्षों तक तपस्या की थी। यह मठ न केवल भारत, बल्कि विदेशों में भी सांख्य दर्शन के अध्ययन के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है।
कपिल मठ, मधुपुर का इतिहास और महत्व
स्थापना : स्वामी हरिहरानंद अरण्य ने सांख्य, योग और संबंधित दर्शनों के प्रकाश में आध्यात्मिक साधना के लिए इसकी स्थापना की थी।
तपस्या स्थल : उन्होंने यहां की गुफा में वर्षों तक कठिन साधना की थी।
सांख्य दर्शन का केंद्र : यह मठ सांख्य और योग पर दर्शनों के प्रकाशन और संरक्षण के लिए जाना जाता है।
परिसर : मठ परिसर में स्वामी हरिहरानंद और स्वामी धर्ममेघ अरण्य की समाधि भूमि है।
दर्शन : यहां कपिल मुनि, जो सांख्य दर्शन के प्रवर्तक माने जाते हैं, की कमल पर ध्यानमग्न प्रतिमा है, जिसके पास एक बाघ और हिरण को शांतिपूर्ण ढंग से बैठे हुए दिखाया गया है।
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