फोटो - प्रभाकर शांडिल्य, तीर्थ पुरोहित, बाबा बैद्यनाथ धाम
जोहार देवघर, 13 फरवरी। महाशिवरात्रि 2026 (Mahashivratri 2026) हिंदू धर्म का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और पावन पर्व है, जिसे शिव भक्त हर वर्ष गहरी आस्था और उत्साह के साथ मनाते हैं। झारखंड के देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम (Deoghar Baba Mandir Puja) में महाशिवरात्रि पर्व का अद्भुत स्वरूप देखने को मिलता है। यहां पर देवाधिदेव महादेव और माता पार्वती का विधिवत विवाह संपन्न कराया जाता है। इसे लेकर महादेव की आकर्षक बारात निकाली जाती है। इस बारात में हजारों लोग शामिल होते हैं और बाबा के बाराती बनने पर खुद को गौरवांवित महसूस करते हैं।
इसे भी पढ़ें – बाबा बैद्यनाथ धाम की अनोखी महिमा, शिव-शक्ति के दिव्य मिलन से पूरी होती है हर मनोकामना
झारखंड के देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम, जिसे कामनालिंग और हृदयापीठ भी कहा जाता है, एक जागृत स्थल है। बाबा बैद्यनाथ की महिमा अपने आप में अनोखी है, बाबा भोले की भक्ति के रूप अलग-अलग हैं, सबका आशीर्वाद ‘तथास्तु’ के रूप में पूर्ण होता है। बाबा बैद्यनाथ से आप कुछ भी मांग लीजिए, बाबा उसे पूरा करते हैं। कहते हैं, ‘कर्ता करे न कर सके, शिव करे सो होय, तीन लोक नौ खंड में, शिव से बड़ा न कोय।’ यह देवघर स्थित कामनालिंग के भक्तों से बढ़कर कोई नहीं जानता है।
कामनालिंग महादेव : देवघर शिव और शक्ति दोनों का स्थान
देवघर में महाशिवरात्रि पर धार्मिक भावनाओं से ओत-प्रोत कई भव्य आयोजन होते हैं, जिसके केंद्र-बिंदु शिव होते हैं, जो साकार भी हैं और निराकार भी। महाशिवरात्रि पर भगवान भोले की चतुष्प्रहर पूजा होती है, यह अपने आप में अनूठी परंपरा है, जो अन्यत्र नहीं होती है। देवघर शिव और शक्ति दोनों का स्थान है, यहां पर माता सती का हृदय गिरा था और उसके ऊपर बाबा शिवलिंग के रूप में विराजमान हैं। इसी कारण इसे आत्मालिंग और कामनालिंग भी कहा जाता है।
बाबा बैद्यनाथ धाम के तीर्थ पुरोहित प्रभाकर शांडिल्य का कहना है कि बाबा बैद्यनाथ धाम का उल्लेख करते हुए द्वादश ज्योतिर्लिंग स्रोतम में लिखा गया है, ‘पूर्वोत्तरे प्रज्वलिकानिधाने सदा वसंतं गिरिजासमेतम्। सुरासुराराधितपादपद्यं श्रीवैद्यनाथं तमहं नमामि।’ देवघर एक शहर नहीं है, यह एक संस्कार है और ‘जेकर नाथ भोलेनाथ, उ अनाथ कैसे होई’ को जीते लोग भी हैं। हर आयोजन, पर्व-त्योहार, सफलता-विफलता, सबकुछ बाबा को समर्पित करने वाले देवघर के लोग महाशिवरात्रि के आगमन से फूले नहीं समाते हैं। महाशिवरात्रि पर पूरे शहर को सजाया जाता है। शिव बारात में बच्चे, बूढ़े, युवा से लेकर महिलाएं और खुद देवता भी शामिल होते हैं।
बाबा बैद्यनाथ धाम में की गई हर प्रार्थना स्वीकार होती है…
प्रभाकर शांडिल्य आगे कहते हैं, “महाशिवरात्रि पर देवघर पूरी तरह शिवमय हो जाता है। यहां चतुष्प्रहर पूजा की विशेष परंपरा निभाई जाती है, जो देश के अन्य शिव धामों में दुर्लभ है। रातभर चलने वाली पूजा में शिव विवाह की पूर्ण विधि संपन्न होती है। इस दिन बाबा बैद्यनाथ को सिंदूर अर्पित किया जाता है और मोर मुकुट चढ़ाया जाता है। मान्यता है कि महाशिवरात्रि पर बाबा को मोर मुकुट अर्पित करने से विवाह में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं। खासकर अविवाहित युवक-युवतियों के लिए यह परंपरा बेहद फलदायी मानी जाती है। इस दिन बाबा का सामान्य श्रृंगार नहीं होता, बल्कि विवाह संस्कार को ही सर्वोच्च स्थान दिया जाता है।”
तीर्थ पुरोहित प्रभाकर शांडिल्य यह भी कहते हैं कि देवघर वह पवित्र स्थल है, जहां माता सती का हृदय गिरा था और उसी स्थान पर भगवान शिव शिवलिंग रूप में विराजमान हैं। इसी कारण बाबा बैद्यनाथ धाम शिव और शक्ति दोनों का केंद्र माना जाता है। द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र में भी बाबा बैद्यनाथ की महिमा का विशेष उल्लेख है, जो इस स्थान की आध्यात्मिक महत्ता को और बढ़ाता है। देवाधिदेव महादेव शिव ध्यानस्थ रहते हैं, जबकि माता सती सदैव जागृत रहती हैं। जब भक्त अपनी मनोकामना लेकर आते हैं, तो माता सती उसे बाबा तक पहुंचाती हैं। यही कारण है कि बाबा बैद्यनाथ को कामनालिंग कहा जाता है और यहां की गई हर प्रार्थना स्वीकार होती है।
—–समाप्त—–
