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जोहार दिल्ली, 30 जनवरी। गणतंत्र दिवस के बाद विजय चौक पर गुरुवार की शाम बीटिंग द रिट्रीट सेरेमनी 2026 (Republic Day Beating Retreat Ceremony 2026) का आयोजन किया गया। इसके साथ ही चार दिनों तक चले गणतंत्र दिवस कार्यक्रमों का समापन हो गया। इस अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु विशेष रूप से मौजूद रहीं। समारोह में उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, तीनों सेनाओं के प्रमुख सहित अन्य केंद्रीय मंत्री और आम नागरिक भी उपस्थित रहे। समारोह को लेकर विजय चौक की सभी प्रमुख इमारतों को रंग-बिरंगी लाइटिंग से सजाया गया है।
राष्ट्रपति भवन कार्यालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “77वें गणतंत्र दिवस समारोह का समापन विजय चौक पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की अध्यक्षता में बीटिंग रिट्रीट समारोह के साथ हुआ। यह समारोह राष्ट्रीय उत्सवों का एक शानदार समापन था। सशस्त्र बलों और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के बैंडों ने अपने उत्कृष्ट प्रदर्शनों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया, जो राष्ट्रीय एकता की भावना और सशस्त्र बलों के अटूट शौर्य को दर्शाते थे। मधुर धुनें राष्ट्र की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और सैन्य परंपराओं का प्रतीक थीं।”
वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “बीटिंग रिट्रीट 2026 में आर्मी मिलिट्री बैंड द्वारा प्रस्तुत धुनें उत्कृष्ट थीं। ऑपरेशन सिंदूर, वंदे मातरम के 150 वर्ष, भारत की नारी शक्ति की क्रिकेट विजय, साथ ही अश्विनी ड्रोन, भैरव बटालियन और प्राचीन ‘गरुड़ व्यूह’ युद्ध संरचना के प्रदर्शन सहित प्रस्तुत की गई संरचनाएं भी उतनी ही शानदार थीं।”
बीटिंग रिट्रीट समारोह की शुरुआत में सेना ने राष्ट्रपति को नेशनल सैल्यूट दिया। इसके बाद तिरंगा फहराया गया और राष्ट्रगान की धुन बजाई गई। तीनों सेनाओं के बैंड ने समारोह की शुरुआत धुन ‘कदम-कदम बढ़ाए जा’ बजाकर की। तीनों सेनाओं के साथ सीएपीएफ के बैंड ने राष्ट्रपति मुर्मू के सामने भारतीय धुनें बजाईं। वहीं, वायुसेना के बैंड ने पिछले साल रिटायर किए गए फाइटर जेट मिग-21 की आकृति बनाई। जबकि, नौसेना बैंड ने वंदे मातरम की 150वीं सालगिरह के मौके पर तीन आकृतियां बनाईं।
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संयुक्त सेना के पाइप्स एंड ड्रम्स बैंड ने ‘अतुल्य भारत’, ‘वीर सैनिक’, ‘मिली झुली’, ‘नृत्य सरिता’, ‘मरूनी’ और ‘झेलम’ जैसी मधुर धुनें पेश कीं। केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) के बैंड ने ‘विजय भारत’, ‘हथरोही’, ‘जय हो’ और ‘वीर सिपाही’ की धुनें बजाईं। इसके अलावा भारतीय वायुसेना के बैंड ने ‘ब्रेव वॉरियर’, ‘ट्वाइलाइट’, ‘अलर्ट’ और ‘फ्लाइंग स्टार’ जबकि, नौसेना बैंड ‘हम तैयार हैं’, ‘सागर पवन’, ‘मां तुझे सलाम’, ‘जोशीला देश’ और ‘जय भारती’ की प्रस्तुति दी।
भारतीय सेना के बैंड ने ‘विजयी भारत’, ‘आरंभ है प्रचंड है’, ‘ऐ वतन, ऐ वतन’, ‘आनंद मठ’, ‘सुगम्य भारत’, ‘आता उठवू सारे रान’, ‘देस मारो माटी नो रंग चे’, ‘देह शिवा वर मोहे’ और ‘भैरव’ की मनोहारी प्रस्तुतियां दीं। बीटिंग रिट्रीट समारोह के अंत में संयुक्त बैंड ने ‘भारत की शान’, ‘ड्रमर्स कॉल’ और ‘वंदे मातरम’ की धुनें बजाईं। इस समारोह का समापन बिगुलरों की अमर धुन ‘सारे जहां से अच्छा’ के साथ हुआ। इस साल बीटिंग रिट्रीट की एक विशेषता यह है कि विजय चौक के सीटिंग एनक्लोजर को भारतीय वाद्य यंत्रों के नाम दिए गए थे। इनमें बांसुरी, डमरू, एकतारा, तबला, वीणा, सितार, शहनाई, संतूर, सरोद, पखावज, नगाड़ा और मृदंगम जैसे वाद्य शामिल थे।
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