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जोहार दिल्ली, 25 फरवरी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल (Modi Cabinet) की आर्थिक मामलों की समिति ने मंगलवार को रेल मंत्रालय की लगभग 9,072 करोड़ रुपए की लागत से रेलवे लाइनों की संख्या बढ़ाने संबंधी तीन परियोजनाओं को स्वीकृति दी। इनमें गोंडिया से जबलपुर लाइन दोहरीकरण, पुनारख से किऊल तीसरी और चौथी लाइन तथा गम्हरिया से चांडिल (Gamharia – Chandil Rail Line) तीसरी और चौथी लाइन शामिल हैं। महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, बिहार और झारखंड (Jharkhand Gift) के 8 जिलों में व्याप्त इन तीन परियोजनाओं से भारतीय रेलवे के मौजूदा नेटवर्क में लगभग 307 किलोमीटर की बढ़ोतरी होगी। प्रस्तावित मल्टी-ट्रैकिंग परियोजना से लगभग 5,407 गांवों में संपर्क में सुधार होगा, जिनकी आबादी लगभग 98 लाख है।
कैबिनेट के फैसले पर पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “देशभर में रेल नेटवर्क के विकास और विस्तार के लिए हम पूरी प्रतिबद्धता के साथ जुटे हैं। इसी दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए हमारी सरकार ने गोंदिया-जबलपुर, पुनारख-किऊल और गम्हरिया-चांडिल के बीच तीन मल्टीट्रैकिंग प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी है। ‘पीएम गतिशक्ति’ के तहत इन परियोजनाओं से महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, बिहार और झारखंड में आर्थिक विकास तेज होने के साथ-साथ रोजगार और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।”
बढ़ी हुई रेल लाइन क्षमता से आवागमन में उल्लेखनीय सुधार आएगा और भारतीय रेलवे की परिचालन दक्षता और सेवा विश्वसनीयता बढ़ेगी। रेलवे लाइनों की संख्या बढ़ाने संबंधी प्रस्ताव से परिचालन सुव्यवस्थित बनाने और यात्री तथा माल भीड़भाड़ कम करने में मदद मिलेगी। प्रधानमंत्री मोदी के नए भारत के भविष्य दृष्टि अनुरूप इन परियोजनाओं का उद्देश्य क्षेत्र के व्यापक विकास द्वारा रोजगार/स्वरोजगार के अवसर बढ़ाकर वहां के लोगों को आत्मनिर्भर बनाना है।
प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के अंतर्गत तैयार इन परियोजनाओं का मुख्य उद्देश्य एकीकृत योजना और हितधारकों के परामर्श से बहुमार्गीय संपर्क और परिवहन दक्षता बढ़ाना है। इन परियोजनाओं से लोगों, वस्तुओं और सेवाओं की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित होगी। इस प्रस्तावित क्षमता वृद्धि से देश भर के कई प्रमुख पर्यटन स्थलों तक रेल संपर्क में सुधार होगा, जिनमें जबलपुर के कचनार शिव मंदिर, बालाघाट में कान्हा राष्ट्रीय उद्यान, गंगुलपारा बांध और जलप्रपात, पेंच राष्ट्रीय उद्यान, धुआंधार जलप्रपात, बरगी बांध, गोमजी-सोमजी मंदिर, चंदिल बांध, दलमा हिल टॉप, हेसाकोचा जलप्रपात, रायजामा घाटी, दलमा वन्यजीव अभ्यारण्य आदि शामिल हैं।
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ये परियोजनाएं कोयला, इस्पात, लौह अयस्क, सीमेंट, गिट्टी और पत्थर के टुकड़े, फ्लाई ऐश, उर्वरक, चूना पत्थर, मैंगनीज, डोलोमाइट, खाद्यान्न, सार्वजनिक तेल और उत्पाद-पीओएल जैसी वस्तुओं की ढुलाई के लिए आवश्यक मार्ग हैं। इन रेल मार्गों के क्षमता वर्धन से प्रति वर्ष 52 मिलियन टन (एमटीपीए) की अतिरिक्त माल ढुलाई हो सकेगी। पर्यावरण अनुकूल और ऊर्जा कुशल परिवहन माध्यम होने से रेलवे जलवायु लक्ष्यों को प्राप्त करने और देश की प्रचालन लागत कम करने में सहायक होगा। साथ ही इससे तेल आयात में 6 करोड़ लीटर की कमी आएगी और कार्बन उत्सर्जन लगभग 30 करोड़ किलोग्राम घटेगा, जो एक करोड़ पौधरोपण के बराबर है। (पीआईबी)
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