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जोहार रांची, 25 दिसंबर। हिंदू धर्म में खरमास को एक विशेष और संवेदनशील समय माना जाता है। इस अवधि में सूर्यदेव का प्रभाव सामान्य दिनों की तुलना में कम होता है। इसी वजह से विवाह, गृह प्रवेश, नामकरण और मुंडन जैसे बड़े मांगलिक कार्य इस दौरान नहीं किए जाते हैं। मान्यता है कि इस समय किए गए शुभ कार्य स्थायी फल नहीं देते, इसलिए इन्हें टालना ही उचित माना गया है।
हालांकि, खरमास से जुड़ा यह नियम केवल सामाजिक विश्वास पर आधारित नहीं है, बल्कि इसके पीछे ज्योतिषीय गणना भी मौजूद है। प्राचीन काल से ही मनुष्य ग्रहों की चाल और समय की गणना के आधार पर किसी भी कार्य की शुरुआत या समाप्ति करता आया है। खरमास भी इसी परंपरा का हिस्सा है।
2025 में खरमास कब से कब तक?
साल 2025 में वर्तमान खरमास 16 दिसंबर से शुरू हुआ है। ज्योतिषीय पंचांग के अनुसार, जिस दिन सूर्यदेव धनु राशि में प्रवेश करते हैं, उसी दिन से खरमास की शुरुआत मानी जाती है। यह अवधि लगभग 30 दिनों तक रहती है और 14 जनवरी 2026 को मकर संक्रांति के साथ समाप्त होगी। इन दिनों सभी बड़े मांगलिक कार्य स्थगित रखे जाते हैं।
खरमास में क्या नहीं करना चाहिए?
खरमास के दौरान विवाह, गृह प्रवेश, नामकरण, मुंडन, सगाई और अन्य बड़े संस्कार नहीं किए जाते। माना जाता है कि इस समय सूर्यदेव की शक्ति कम होती है, जिससे नए कार्यों की शुरुआत स्थिर और सफल नहीं हो पाती।
हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि खरमास में पूजा-पाठ, दान, भक्ति और सेवा कार्य पूरी तरह शुभ माने जाते हैं। इन्हें करने से पुण्य फल की प्राप्ति होती है।
खरमास में क्या करना शुभ माना जाता है?
समाज में खरमास को संयम, विश्राम और आध्यात्मिक साधना का समय माना जाता है। इस दौरान लोग भजन-कीर्तन, कथा, दान और धार्मिक कार्यों में अधिक समय देते हैं। सदियों से चली आ रही यह परंपरा आज भी कई परिवारों द्वारा पूरी श्रद्धा के साथ निभाई जाती है।
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खरमास की सामाजिक परंपरा
भारतीय समाज में खरमास को एक तरह से ठहराव का समय माना जाता है। सदियों से परिवार इस अवधि में बड़े सामाजिक आयोजनों से बचते आए हैं। बाल विवाह, नामकरण और गृह प्रवेश टालने की परंपरा आज भी कई घरों में निभाई जाती है।
साल में दो बार क्यों आता है खरमास?
खरमास साल में दो बार आता है। पहली बार जब सूर्य धनु राशि में प्रवेश करता है और दूसरी बार जब सूर्य मीन राशि में प्रवेश करता है। दोनों ही स्थितियों में सूर्य की गति और प्रभाव को ज्योतिषीय रूप से कमजोर माना गया है, इसलिए इन दोनों अवधियों को खरमास कहा जाता है।
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