फोटो - पीआरडी रांची
जोहार रांची, 9 मार्च। झारखंड ऑपर्च्यूनिटीज फॉर हर्नेसिंग रूरल ग्रोथ प्रोजेक्ट (Jharkhand Johar Pariyojana) विश्व बैंक एवं पलाश (जेएसएलपीएस) के तहत 17 जिलों के 68 प्रखंडों में उच्च मूल्य कृषि, पशुधन, मत्स्य पालन, और लघु-वनोपज क्षेत्र के 3,500 उत्पादक समूहों के समर्थन के माध्यम से 2,00,000 परिवारों की आय में वृद्धि करने में सफल रही है। इस छह-वर्षीय परियोजना ने उत्पादकता में वृद्धि, बेहतर बाजार संपर्क, मूल्य-संवर्धन और विस्तार सेवाओं को बनाए रखने में सहायता की है। इसके साथ ही झारखंड के लक्षित परिवारों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने में सफल रही है। यह योजना 2018 से 2024 के दौरान 17 जिलों के 68 प्रखंडों में संचालित रही।
परियोजना के अंतर्गत सफलतापूर्वक 2.24 लाख उत्पादकों को 3,922 उत्पादक समूहों में संगठित किया गया। इन संस्थानों को समर्थन देने के लिए लगभग 17,000 सामुदायिक कैडरों को प्रशिक्षित किया गया। परियोजना के कुल लाभार्थियों में से 64% अनुसूचित जाति-जनजाति परिवार हैं। कुल 2,729 उच्च मूल्य कृषि उत्पादक समूहों का गठन किया गया, जिसके अंतर्गत 1,55,902 परिवारों को जोड़ा गया।
588 पॉली नर्सरी हाउस स्थापित किए गए एवं नर्सरी उद्यमियों को मिट्टी रहित पौधा उगाने हेतु प्रशिक्षित किया गया है। 1,025 लिफ्ट सिंचाई के माध्यम से 6,150 हेक्टेयर कमांड क्षेत्र का निर्माण किया गया है। 1,182 सोलर मूवेबल सिस्टम उत्पादक समूह के माध्यम से लघु व सीमांत किसानों के उपयोग के लिए दिए गए, जिनके माध्यम से कुल 2,364 हेक्टेयर कमांड क्षेत्र भूमि सिंचित हुई। सिंचाई योजनाओं के माध्यम से कुल 25,000 किसानों को जोड़ा गया।
बकरी एवं सुकर पालन में राज्य के तकरीबन 26,000 महिलाओं को जोड़ा गया। तकरीबन 300 लाभुक अंडा उत्पादन को-ऑपरेटिव से जुड़ कर वार्षिक 3.60 करोड़ अंडे का उत्पादन कर रहे हैं एवं इस गतिविधि के तहत को-ऑपरेटिव करीब 45 करोड़ का कारोबार कर चुकी है। तकरीबन 500 लाभुक ब्रायलर मुर्गी पालन के लिए फेडरेशन से जुड़ कर वार्षिक 20 लाख ब्रायलर मुर्गी पालन कर रहे हैं।
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बैकयार्ड कुक्कुट पालन के तहत परियोजना में अभी तक करीब 65,000 परिवारों को जोड़ा गया है। 21 किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) का गठन किया जा चुका है, जिन्होंने कुल मिलाकर 181 करोड़ से अधिक का व्यापार किया है और 50% एफपीओ ने शुद्ध लाभ प्राप्त किया है। एफपीओ द्वारा 35 ग्रामीण व्यापार केंद्र, 28 पशुपालन सेवा केंद्र और 138 कस्टम हायरिंग सेंटर संचालित किए जा रहे हैं। परियोजना की लाभुक ग्रामीण महिलाएं, जो अब गरीबी से बाहर आकर एक समृद्ध जीवन जी रही हैं, जो विभिन्न आजीविकाओं से महिला सशक्तीकरण को दर्शाती हैं।
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