झरिया महाराज की कोठी में स्थापित हुआ मधुपुर कॉलेज, वर्षों बाद भी पीजी की पढ़ाई नहीं (Photo: Sunny Khan, Madupur.)
जोहार देवघर, 20 दिसंबर। देवघर जिले का मधुपुर सैलानियों और गुलाबों का शहर के रूप में आसपास के राज्यों में चर्चित है। ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विविधता को एकसूत्र में समेटे इस शहर की गरिमा का प्रकाश मधुपुर कॉलेज आज भी फैला रहा है। कॉलेज में ज्ञान-विज्ञान के अलावा खेलकूद, कला, साहित्य, संगीत समेत छात्रों की चेतना को जागृत करनेवाले कार्यक्रम समय-समय पर आयोजित होते रहते हैं। सिदो-कान्हू मुर्मू विवि से संबद्ध इस कॉलेज में कला, वाणिज्य और विज्ञान में स्नातक की पढ़ाई होती है। बावजूद इसके यहां आशा के अनुरूप छात्रों को स्नातकोत्तर की शिक्षा हासिल नहीं हो पा रही है।
1966 में स्थापित हुआ था कॉलेज
मधुपुर कॉलेज की स्थापना 1966 में हुई थी। तत्कालीन श्यामा प्रसाद हाई स्कूल में कॉलेज शुरू हुआ। इसके बाद यहां के लोगों के सहयोग से 1976 में पथरचपटी मोहल्ला स्थित झरिया महाराज की कोठी को कॉलेज के लिए खरीदा गया। पहले यह भागलपुर विवि के अधीन था। पूर्व विधायक यासीन अंसारी, पूर्व विधायक डॉ. अजीत कुमार बनर्जी, देवनारायण कुंडू, द्वारिका प्रसाद चौधरी, रामकृष्ण चौधरी, मोतीलाल डालमिया, स्वतंत्रता सेनानी स्व. ज्वाला प्रसाद राय, भोला सर्राफ, शिक्षाविद् रामावतार साह, चंद्रशेखर साह, सीताराम साह, वासुदेव प्रसाद, तत्कालीन रेलवे न्यायिक दंडाधिकारी केशव प्रसाद, देवघर के तत्कालीन एसडीओ कृष्णादेव प्रसाद सिंह आदि सैकड़ों ने कॉलेज स्थापना में मदद दी।
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विषयवार शिक्षकों की कमी से परेशानी
कॉलेज में प्राचीन व आधुनिक पुस्तकों से सुसज्जित पुस्तकालय, प्रयोगशाला है। निर्धन मेधावी छात्रों के लिए छात्रवृत्ति की सुविधा भी उपलब्ध है। यहां आठ हजार से अधिक छात्र-छात्राएं विभिन्न विषयों की पढ़ाई कर रहे हैं। कॉलेज में विषयवार शिक्षकों की कमी है। इस कारण सही तरीके से पढ़ाई नहीं हो पाती। वहीं स्नातकोत्तर की पढ़ाई नहीं होने से छात्रों को देवघर या अन्य जगहों का रुख करना पड़ता है। कई बार छात्र संगठनों ने इस समस्या की ओर कॉलेज प्रबंधन का ध्यान आकृष्ट कराया। आज तक इस समस्या का समाधान नहीं हो सका।
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