फोटो - जोहार संथाल डेस्क
जोहार पटना, 6 फरवरी। इंडियन मोशन पिक्चर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (IMPPA) ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI Training) ट्रेनिंग के लिए प्रस्तावित “हाइब्रिड” कॉपीराइट लाइसेंसिंग फ्रेमवर्क (Hybrid Copyright Licensing Framework) को वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) से इसे समाप्त करने का आग्रह किया है। इंम्पा ने विभाग की निदेशक सिमरत कौर को भेजे गए अपने अभ्यावेदन में स्पष्ट किया है कि फिल्म, संगीत और मनोरंजन कंटेंट को किसी भी अनिवार्य या आम लाइसेंसिंग सिस्टम से पूरी तरह बाहर रखा जाना चाहिए।
साथ ही जनरेटिव एआई और कॉपीराइट से जुड़े विषयों की जांच करने वाली समिति तथा अतिरिक्त सचिव, उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग, भारत सरकार की अध्यक्ष हिमानी पांडे को भी पत्र लिखकर इंम्पा ने बिना प्रोड्यूसर/क्रिएटर की विशेष सहमति के एआई ट्रेनिंग के लिए प्रस्तावित हाइब्रिड कॉपीराइट लाइसेंसिंग फ्रेमवर्क पर विरोध दर्ज कराया। इंम्पा के अध्यक्ष अभय सिन्हा ने दिनांक 19 जनवरी 2026 (संदर्भ संख्या इंम्पा/130/5007/2026) के पत्र पर कहा कि अपने सदस्यों और प्रमुख अधिकार धारकों के साथ आगे की आंतरिक चर्चा तथा प्रस्तावित फ्रेमवर्क के प्रभावों की विस्तृत समीक्षा के बाद, हम स्पष्ट रूप से एक बार फिर अपनी यह स्थिति दोहराने के लिए बाध्य हैं कि वर्तमान स्वरूप में यह प्रस्ताव हमें पूरी तरह से स्वीकार्य नहीं है।
इंम्पा अध्यक्ष अभय सिन्हा ने कहा कि संगठन 1937 से भारतीय फिल्म और मनोरंजन उद्योग के हितों की रक्षा करता आ रहा है और आज इसके 26 हजार से अधिक सदस्य देश-विदेश में सक्रिय हैं। इनमें फिल्म, टीवी, वेब सीरीज, म्यूजिक, ओटीटी, एनिमेशन और पोस्ट-प्रोडक्शन से जुड़े प्रोड्यूसर व सर्विस प्रोवाइडर शामिल हैं। उन्होंने कहा कि एआई और कॉपीराइट पर डीपीआईआईटी के वर्किंग पेपर पर चर्चा स्वागतयोग्य है, लेकिन किसी भी तरह का अनिवार्य लाइसेंसिंग ढांचा रचनात्मक स्वतंत्रता और निवेश के लिए घातक साबित होगा।
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इंम्पा अध्यक्ष ने साफ शब्दों में कहा कि मौजूदा कॉपीराइट कानून, कॉपीराइट एक्ट 1957, पूरी तरह सक्षम है और इसमें बदलाव की कोई जरूरत नहीं है। एआई ट्रेनिंग के लिए लाइसेंस का कम होना कानून की कमजोरी नहीं, बल्कि बाजार के शुरुआती चरण का परिणाम है। इस स्तर पर किसी तरह की अनिवार्य व्यवस्था लागू करना जल्दबाजी होगी, जिससे सही मूल्य निर्धारण और स्वैच्छिक बातचीत आधारित लाइसेंसिंग का प्राकृतिक विकास बाधित होगा।
एसोसिएशन ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि एआई ट्रेनिंग के लिए कॉपीराइटेड कंटेंट का उपयोग केवल राइट्स होल्डर की पहले से स्पष्ट और अनिवार्य सहमति के बाद ही होना चाहिए। कॉपीराइट सिर्फ मुआवज़े तक सीमित नहीं है, बल्कि यह यह तय करने का अधिकार भी देता है कि कंटेंट का उपयोग होगा या नहीं। बिना अनुमति कंटेंट का इस्तेमाल क्रिएटिव आज़ादी, व्यावसायिक रणनीति और प्रतिष्ठा को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है।
पत्र के जरिए अभय सिन्हा ने यह भी कहा कि सिनेमैटोग्राफ फिल्में और प्रीमियम ऑडियो-विजुअल कंटेंट हाई-वैल्यू प्रॉपर्टी हैं, जिनमें भारी निवेश और जटिल अनुबंध शामिल होते हैं। भारतीय कानून ने जानबूझकर फिल्मों को वैधानिक लाइसेंसिंग से बाहर रखा है। ऐसे में एआई ट्रेनिंग के लिए फिल्मों को “कच्चे माल” की तरह इस्तेमाल करना न केवल अनुचित है, बल्कि यह मौजूदा कॉन्ट्रैक्ट्स और फाइनेंसिंग मॉडल को भी कमजोर करेगा।
उन्होंने सरकार से आग्रह करते हुए कहा कि सहमति के बिना एआई ट्रेनिंग की अनुमति देने से रचनात्मक अर्थव्यवस्था को दीर्घकालिक नुकसान होगा और अंतरराष्ट्रीय निवेशकों का भरोसा भी डगमगाएगा। संगठन ने स्पष्ट मांग की कि प्रस्तावित “हाइब्रिड” कॉपीराइट लाइसेंसिंग फ्रेमवर्क को पूरी तरह खत्म किया जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि एआई ट्रेनिंग के लिए किसी भी कंटेंट का उपयोग केवल रचनाकार और प्रोड्यूसर की पूर्व अनुमति से ही हो।
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