फोटो - जोहार संथाल डेस्क
जोहार देवघर, 3 मार्च। झारखंड के देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ मंदिर (Deoghar Baba Mandir) में होली (Holi 2026) के अवसर पर ‘हरिहर मिलन’ (Harihar Milan) की अनोखी धार्मिक परंपरा निभाई जाती है। इस दिन भगवान विष्णु यानी श्रीकृष्ण भगवान शिव के साथ होली खेलने के लिए बाबा मंदिर प्रांगण में आते हैं। ‘हरिहर मिलन’ के साथ ही देवघर में होली की शुरूआत हो जाती है। ‘हरिहर मिलन’ में हरि का मतलब भगवान विष्णु और हर का मतलब देवाधिदेव महादेव है।
बाबा बैद्यनाथ धाम द्वादश ज्योतिर्लिंगों में सर्वश्रेष्ठ
झारखंड का बाबा बैद्यनाथ धाम द्वादश ज्योतिर्लिंगों में सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। यहां पर शिव और शक्ति का मिलन हुआ था। यहां कई धार्मिक प्रथाएं प्रचलित हैं, जिसमें एक ‘हरिहर मिलन’ भी है। इस साल ‘हरिहर मिलन’ का आयोजन मंगलवार की सुबह 5.30 बजे किया गया। ऐसा चंद्र ग्रहण के कारण हुआ। इस आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया और खुद के अनोखे अवसर का साक्षी बनने पर गौरवान्वित भी महसूस करते रहे। ‘हरिहर मिलन’ के बाद देवघर और आसपास के क्षेत्रों में होली की औपचारिक शुरुआत हो गई। मुख्य रूप से रंगों का पर्व होली 4 मार्च को मनाया जाएगा। इस दिन बड़ी संख्या में भक्त देवाधिदेव महादेव की पूजा-अर्चना करने भी पहुंचते हैं।
‘हरिहर मिलन’ पर ही भगवान शिव देवघर पधारे
तीर्थ पुरोहित प्रभाकर शांडिल्य ने ‘हरिहर मिलन’ की मूल भावना के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ‘हरिहर मिलन’ के दिन ही बाबा बैद्यनाथ देवघर पधारे थे। इस दौरान कई अनुष्ठान होते हैं। ‘हरिहर मिलन’ के अवसर पर भगवान विष्णु (श्रीकृष्ण) अपने आराध्य भगवान शिव से मिलने आते हैं। फिर, दोनों देवता एक साथ होली खेलते हैं। इस अनोखी प्रथा के पीछे दैत्यराज रावण की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। रावण ने कठिन तपस्या करके भगवान शिव को लंका चलने के लिए राजी कर लिया था। लेकिन, भगवान शिव ने एक शर्त रखी थी कि अगर वह लंका से पहले कहीं पर भी शिवलिंग रख देगा तो उसकी स्थापना वहीं हो जाएगी।
हर साल होली पर श्रीकृष्ण का बाबा मंदिर आगमन
उन्होंने आगे बताया कि रावण शिवलिंग लेकर लंका जा रहे थे और भगवान विष्णु वृद्ध ब्राह्मण के वेश में जमीन पर खड़े थे। इसी दौरान रावण को लघुशंका लगी और वह जमीन पर उतर गया। बैद्यनाथ धाम में माता सती का हृदय गिरा था। यही कारण था कि भगवान विष्णु की योजना के अनुसार इसी स्थान पर रावण को शिवलिंग लेकर जमीन पर उतरना पड़ा। रावण ने वृद्ध व्यक्ति को शिवलिंग दिया और लघुशंका निवारण के लिए चला गया। इसी बीच भगवान विष्णु ने शिवलिंग को देवघर की पावन धरा पर रख दिया। इस तरह देवघर में भगवान शिव और माता सती का मिलन हो गया। विष्णु जी ने जिस शिवलिंग को ग्रहण किया था, उसी के साथ हर साल होली खेलने आते हैं।
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भगवान शिव को प्राकृतिक गुलाल चढ़ाने की परंपरा
प्रभाकर शांडिल्य ने बताया, “’हरिहर मिलन’ की प्रथा बेहद खास है। इस दिन कृष्ण जी की प्रतिमा साल में एक बार बाहर निकलती है। वे बैजू मंदिर के पास जाकर झूला झूलते हैं। इसके बाद उनका आगमन बाबा बैद्यनाथ मंदिर में होता है। जहां पर श्रीकृष्ण भगवान शिव के साथ रंग और गुलाल खेलते हैं। इस दिन भगवान को विशेष भोग भी लगता है। भक्त उत्साह के साथ गुलाल चढ़ाते हैं और दोनों देवताओं से आशीर्वाद लेते हैं। भगवान को प्राकृतिक गुलाल चढ़ाया जाता है, जिसे प्रसाद स्वरूप भक्त अपने साथ लेकर लौटते हैं और घर-परिवार के लोगों को टीका लगाकर पुण्य के भागी बनते हैं। ‘हरिहर मिलन’ के बाद भगवान श्रीकृष्ण अपने स्थान पर लौट जाते हैं।
द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र में भी बाबा बैद्यनाथ की महिमा
देवघर वह पवित्र स्थल है, जहां माता सती का हृदय गिरा था और उसी स्थान पर भगवान शिव शिवलिंग के रूप में विराजमान हैं। इसी कारण बाबा बैद्यनाथ धाम शिव और शक्ति दोनों का केंद्र माना जाता है। द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र में भी बाबा बैद्यनाथ की महिमा का विशेष उल्लेख है, जो इस स्थान की आध्यात्मिक महत्ता को और बढ़ाता है। देवाधिदेव महादेव शिव ध्यानस्थ रहते हैं, जबकि माता सती सदैव जागृत रहती हैं। जब भक्त अपनी मनोकामना लेकर आते हैं, तो माता सती उसे बाबा तक पहुंचाती हैं। यही कारण है कि बाबा बैद्यनाथ को ‘कामनालिंग’ भी कहा जाता है और यहां की गई हर प्रार्थना स्वीकार होती है।
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